Gantantra Diwas 2026 Highlights: इस बार कर्तव्य पथ पर क्या था खास? जानें पूरी डिटेल
Gantantra Diwas 2026: भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) पूरे हर्षोल्लास और गर्व के साथ मनाया। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड ने न केवल भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और सांस्कृतिक विविधता की एक अनोखी झलक भी पेश की और भारत ने अब यह साबित कर दिया है कि वह अन्य देशों की तरह ही प्रगति कर रहा देश है।
अगर आप इस साल की परेड नहीं देख पाए हैं या इसकी खास बातों को विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। आइए जानते हैं कि 26 जनवरी 2026 की परेड में कौन-कौन से मुख्य आकर्षण रहे और नीचे इस बात की पूरी जानकारी दी गई है कि हमारा देश अब पहले की तुलना में कितना आगे है।
1. नारी शक्ति का अद्भुत संगम (Women Power)
पिछले कुछ वर्षों की तरह, इस बार भी ‘नारी शक्ति’ गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य केंद्र रही। 2026 की परेड में पहली बार कई सैन्य टुकड़ियों का नेतृत्व पूरी तरह से महिला अधिकारियों द्वारा किया गया। थल सेना, वायु सेना और नौसेना की संयुक्त महिला मार्चिंग टुकड़ी ने यह संदेश दिया कि भारत की बेटियां अब हर मोर्चे पर देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
इतना ही नहीं, सीमा सुरक्षा बल (BSF) की ‘डेयरडेविल्स’ महिला जवानों ने मोटरसाइकिल पर जो हैरतअंगेज स्टंट दिखाए, उसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए।
2. स्वदेशी तकनीक और डिफेंस स्टार्टअप्स का जलवा
2026 का गणतंत्र दिवस ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सबसे बड़ा उदाहरण था। इस बार की परेड में किसी भी विदेशी हथियार का प्रदर्शन नहीं किया गया।
- Made in India Weapons: स्वदेशी रूप से विकसित ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर, ‘अर्जुन’ टैंक और ‘पिनाका’ मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ने दुनिया को भारत की रक्षा शक्ति का परिचय दिया।
- AI और भविष्य की तकनीक: परेड में पहली बार भारत के डिफेंस स्टार्टअप्स द्वारा बनाए गए ‘स्वार्म ड्रोन्स’ (Swarm Drones) और रोबोटिक सोल्जर्स की एक छोटी झलक भी दिखाई गई, जो यह बताती है कि भारतीय सेना अब आधुनिक युद्ध कला में कितनी आगे निकल चुकी है।
3. राज्यों की झांकियां: संस्कृति का महाकुंभ (State Tableaux)
परेड का सबसे रंगीन हिस्सा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां (Tableaux) होती हैं। 2026 में कुल 16 राज्यों और 9 मंत्रालयों की झांकियों को शामिल किया गया था।
- गुजरात की झांकी: गुजरात ने अपनी झांकी में ‘धोलावीरा’ और राज्य की समृद्ध ‘हस्तशिल्प कला’ को प्रदर्शित किया। इसमें कच्छ की कढ़ाई और आधुनिक विकास का शानदार संगम देखने को मिला।
- उत्तर प्रदेश: यूपी की झांकी में अयोध्या के भव्य राम मंदिर के साथ-साथ राज्य के उभरते एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास को दिखाया गया।
- दक्षिण भारत का गौरव: तमिलनाडु और कर्नाटक की झांकियों ने अपनी प्राचीन मूर्तिकला और मंदिरों के इतिहास को जीवंत कर दिया।
4. मुख्य अतिथि और वैश्विक संबंध
इस साल के मुख्य अतिथि के रूप में फ्रांस के राष्ट्रपत की उपस्थिति ने भारत के मजबूत होते राजनयिक संबंधों को दर्शाया। उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि भारत वैश्विक राजनीति में एक ‘विश्वमित्र’ की भूमिका निभा रहा है। और आने वाले समय में, भारत विश्व गुरु बने और सबकी मदद करे।
5. वायु सेना का ‘फ्लाईपास्ट’ (Grand Flypast)
परेड का सबसे रोमांचक हिस्सा अंत में आया, जब भारतीय वायु सेना के विमानों ने आसमान में अपना कौशल दिखाया। राफेल (Rafale), तेजस (Tejas) और सुखोई-30 (Su-30 MKI) विमानों ने ‘वर्टिकल चारली’ और ‘त्रिशूल’ फॉर्मेशन बनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस बार फ्लाईपास्ट में सौर ऊर्जा से चलने वाले एक प्रोटोटाइप ड्रोन को भी शामिल किया गया था, जो पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
6. कर्तव्य पथ का नया स्वरूप
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पूर्ण होने के बाद, कर्तव्य पथ पर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था और डिजिटल सुविधाओं को काफी उन्नत किया गया था। हर कोने पर लगे बड़े LED स्क्रीन्स और क्यूआर कोड आधारित गाइड्स ने आम जनता के अनुभव को और भी बेहतर बना दिया। इन सब बातों से हम समझ सकते हैं कि हमारा देश पहले की तुलना में कितनी प्रगति कर चुका है।
7. निष्कर्ष: एक विकसित भारत की ओर कदम
26 जनवरी 2026 की यह परेड केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प का एक प्रतीक थी। शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और संस्कृति – हर क्षेत्र में भारत जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसकी स्पष्ट झलक इस गणतंत्र दिवस पर देखने को मिली और कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि भविष्य में भारत कितनी तरक्की करेगा।
भारत ने 77वां गणतंत्र दिवस मनाया।
इसकी घोषणा अभी आधिकारिक रूप से होनी बाकी है, लेकिन गुजरात और उत्तराखंड की झांकियां चर्चा में हैं।
मुख्य विषय ‘नारी शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ था।














